दमा(अस्थमा) क्या है?

दमा(Asthma)

एक ऐसी निरंतर स्थिति जिसमें किसी व्यक्ति के वायुमार्ग(airways) सूज जाते हैं, संकीर्ण हो जाते हैं, तथा अतिरिक्त बलगम उत्पन्न होता है जिससे व्यक्ति के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है इसे अस्थमा के रूप में जाना जाता है। दमा मामूली हो सकता है यदि यह दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करता है या बड़ा भी हो सकता है जिसमें व्यक्ति को प्राणघातक हमले का सामना करना पड़ सकता है।

कुछ परिस्थितियों में, वायुमार्ग की सूजन ऑक्सीजन को फेफड़ों तक पहुंचने से रोक सकती है। परिणामस्वरूप, ऑक्सीजन रक्तप्रवाह में प्रवेश नहीं कर पाता तथा आवश्यक अंगों तक नहीं पहुंच पाता। इसलिए, जिन लोगों में गंभीर लक्षण हों उन्हें अस्थमा का इलाज अवश्य कराना चाहिए। उपचार में आमतौर पर उत्प्रेरकों(Triggers) की पहचान करना, उत्प्रेरकों से बचने के लिए सावधानी बरतना और अपनी सांसों की देखभाल करना शामिल है। दमा के लक्षण बदतर हो जाने से अस्थमा का दौरा पड़ सकता है।

अस्थमा के लक्षण वायुमार्ग के माध्यम से आनेवाली  हवा की कम मात्रा से उत्पन्न होते हैं।

अस्थमा के लक्षणों कुछ इस प्रकार हैं:

  1. लगातार खांसी
  2. गर्दन की मांसपेशियों में जकड़न
  3. सीने में जकड़न
  4. सोने में परेशानी
  5. चिंता और घबराहट
  6. साँस लेने में तकलीफ़

अस्थमा क्यों होता है?

उपरोक्त लक्षण अक्सर निम्नलिखित अस्थमा कारणों से उत्पन्न होते हैं:

  1. सर्दी और फ्लू जैसी बीमारी से संक्रमण
  2. मौसम में अचानक बदलाव
  3. मनोवैज्ञानिक कारक जैसे तनाव, चिंता और पैनिक अटैक।
  4. सूजनरोधी औषधियों से संक्रमण
  5. पर्यावरण में प्रदूषण, धुआं
  6. एलर्जी द्वारा उत्प्रेरक होना 
  7. वंशानुगत(genetic) कारक
  8. व्यावसायिक जोखिम

अस्थमा से बचाव

अस्थमा को बढ़ने से बचाने के लिए, नीचे दिए गए निवारक उपायों का पालन करें।  

  1. दमा के विभिन्न उत्प्रेरकों(triggers) को पहचानें
  2. एलर्जी पैदा करने वाले तत्व(allergen) के संपर्क में आने से बचें
  3. किसी भी प्रकार के धुएं से दूर रहें
  4. सर्दी और फ्लू जैसी बीमारियों से बचें
  5. निर्धारित समय अनुसार उचित दवाएँ लें
  6. प्रदूषित वातावरण के संपर्क में आने से बचें
  7. अपने आस-पास साफ़-सफ़ाई रखें
  8. उचित स्वच्छता(hygiene) बनाए रखें

होम्योपैथी द्वारा दमा का इलाज

ब्रोन्कियल अस्थमा ट्रीटमेंट के साथ-साथ निम्नलिखित रोकथामों का पालन किया जाना चाहिए । इसमें आम तौर पर कारणों की पहचान करना, उन कारणों से बचने के उपायों का पालन करना ।और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी दवाएं आपके लक्षणों पर काम कर रही हैं, बार-बार अपनी श्वास की निगरानी करनी चाहिए । अस्थमा का होमियोपैथी इलाज तेजी से बढ़ रहा है और पूरी दुनिया में इसका अभ्यास किया जा रहा है। अस्थमा के कारगर उपचार के लिए भारत होम्योपैथी को चुनें क्योंकि भारत होम्योपैथी द्वारा प्रदान की जाने वाली दवाएं दमा की बीमारी का इलाज करने में सहायक हैं एवं दमा से संबंधित सभी लक्षणों को ठीक करने के लिए अत्यधिक प्रभावी हैं। 

अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित अस्थमा उपचार दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।

  1. अपने अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करें और उन्हें निरंतर नियंत्रण में रखें।
  2. नियमित रूप से व्यायाम करते रहें।
  3. श्वसन (pulmonary) कार्यप्रणाली को यथासंभव सामान्य बनाए रखने का प्रयास करें।
  4. दमा के प्रकोपन को रोकें।
  5. दमा के इलाज से होने वाले दुष्प्रभावों से बचें।

भारत होम्योपैथी क्यों चुनें?

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